जे के पिक्चर्स प्रोडक्शंस के बैनर तले बनाई गई भोजपुरी फिल्म ‘अँचरा के दाग’ का प्रिव्यू मुंबई के इम्पा हॉउस थियेटर में किया गया। पूरी फिल्म देखने के लिए फिल्म इंडस्ट्री के नामी गिरामी दिग्गज हस्तियों ने शिरकत की और सभी ने मुक्त कंठ से फिल्म के कहानी, मेकिंग, लेखन-निर्देशन की मुक्त कंठ से प्रशंसा किया। फिल्म देखने के बाद रिव्यू देते हुए सभी ने कहा कि ‘ये फिल्म एक ऐसी कहानी को बयां कर रही है, जो सौतेली मां के प्रति लोगों की सोच बदल देगी। आज तक लोगों ने कभी सौतेली मां के मातृत्व की चर्चा नहीं की है, सिर्फ सौतेला नजर से ही देखा है। फिल्म के निर्माता निर्देशक ने ये फिल्म बनाकर एक नई मिसाल कायम करते हुए इतिहास रचने का सराहनीय प्रयास किया है। यह फिल्म हर किसी को देखना चाहिए।’ वहीं फिल्म के निर्माता कंधन मुदलियार और लेखक व निर्देशक रामबली गुप्ता ने बताया कि ‘अँचरा के दाग’ सिर्फ एक पारिवारिक नाटकीय फिल्म नहीं, बल्कि समाज के सोच को बदलने वाला आइना है। यह फिल्म दिल को छूती है और दिमाग को झकझोरती है।’
गौरतलब है कि जे के पिक्चर्स प्रा.लि. प्रस्तुत भोजपुरी फिल्म ‘अँचरा के दाग’ का टीजर जे के पिक्चर्स के ऑफिसियल यूट्यूब चैनल पर रिलीज किया जा चुका है। इस फिल्म के निर्माता कंधन मुदलियार हैं। लेखक व निर्देशक रामबली गुप्ता हैं। मुख्य कलाकार काजल यादव, कुणाल तिवारी, रूपा सिंह, आराधना भारती, राहुल कुमार, सरफुद्दीन अंसारी, सुहाना खान, केशव राम, अभय राय, राजमती, अनंत राम, सोनी सुमन, ममता मौर्य, सपना यादव, शिल्पा, मंदीप कुमार, विशाखा हैं। सिंगर साजन मिश्रा और आरती भारद्वाज हैं। गीतकार यादव नीरज, संगीतकार मंदीप विश्वकर्मा, डीओपी राजन जायसवाल, एसोसिएट डायरेक्टर अमरनाथ गुप्ता हैं। एडिट और डीआई महेश नेमा (जानकीदेवी स्टूडियोज़) ने किया है। मेकअप और हेयर राकेश राजभर, पोस्ट-प्रोडक्शन जानकीदेवी स्टूडियोज़ और टीएमके स्टूडियो ने किया है।
इस फिल्म को लेकर फिल्म के निर्माता कंधन मुदलियार ने कहा कि ‘फिल्म ‘अँचरा के दाग’ का मूल उद्देश्य समाज में ममता, स्त्री की असली शक्ति, और सौतेली माँ के प्रति बनी हुई नकारात्मक सोच को चुनौती देना है। यह कहानी एक औरत के निस्वार्थ प्रेम, त्याग और ममता को सामने लाती है, जो अपने सौतेले बेटे के लिए वो कर जाती है, जिसे शायद कोई सगी माँ भी ना कर पाए।’
वहीं लेखक व निर्देशक रामबली गुप्ता ने कहा कि इस फिल्म मुख्य उद्देश्य है –
‘सौतेली माँ की छवि को बदलना’ :
“यह फिल्म समाज में व्याप्त उस धारणा को तोड़ती है कि सौतेली माँ केवल अत्याचार करती है। अनीता के किरदार के माध्यम से यह दिखाया गया है कि ममता खून का नहीं, दिल का रिश्ता है।’
‘महिला सशक्तिकरण’ :
‘अनीता न केवल मातृत्व की मिसाल बनती है, बल्कि अंत में हर महिलाओं को समाज के प्रति अच्छा रुख अपनाने के लिए प्रेरित भी करती है।’
‘गलतफहमियों के परिणाम’ :
‘यह फिल्म दर्शाती है कि शक और अफवाहें किस तरह रिश्तों को तबाह कर सकती हैं- और किस हद तक इंसान गलत निर्णय ले सकता है।’
‘संवेदनशील मुद्दों को संवेदनशीलता से छूना’ : ‘मातृत्व, पुनर्विवाह, गांव की सोच जैसे मुद्दों को सहज और भावनात्मक रूप से प्रस्तुत किया गया है।’
‘सकारात्मक संदेश और अंत’ :
‘फिल्म यह संदेश देती है कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन हों, सच्चाई और ममता अंत में जीतती है।’


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